आज इस अमर-त्रयी को, नमन भी ज़रा-सा कीजिये।
आज इस अजर-त्रयी को, शर्म भी ज़रा-सा कीजिये।
वक़्त के बस मापदण्ड हैं जो गए बदले अभी तक,
आज इस अधर-त्रयी को, गर्म भी ज़रा-सा कीजिये।
आज इस अगर-त्रयी को, गमन भी ज़रा-सा कीजिये।
आज इस अपर-त्रयी को, नर्म भी ज़रा-सा कीजिये।
बंदिशें जो मस्तकों की हैं बन चुकी गाढ़ी हिजाब,
आज इस असर-त्रयी को, कर्म भी ज़रा-सा कीजिये।
आप जग में आज भी मजमा लगाए लीन हैं,
धन्य तीनों प्राण थे जो प्राण में अब लीन हैं।
- सुखदेव।
अमर-त्रयी - तीनों शहीद
अजर-त्रयी - तीसरी तारीख ( बीस के बाद की )
अधर-त्रयी - वेद-first three
अगर-त्रयी - मानव जीवन के तीन संशय
अपर-त्रयी - मानव जीवन की तीन क्षमता से अधिक आँकी गई पहलुएं
असर-त्रयी - मानव जीवन के तीन छद्म नियंत्रक